ग्लूकोमा या काला मोतियाबिंद: अंधेपन का एक बड़ा कारण। कैसे इससे बचा जा सकता है?

ग्लूकोमा या काला मोतियाबिंद क्या है?

ग्लूकोमा या काला मोतियाबिंद आँखों में होने वाला एक ऐसा रोग है जो आँखोें की रौशनी को पूरी तरह छीनकर व्यक्ति को अंधा बना सकता है। ग्लूकोमा से किसी के अंधे होने का सबसे बड़ा कारण है इसके बारे में देर से पता लगना। इसी कारण इसे खामोश चोर (साइलेंट थीफ) भी कहा जाता है। देर से पता चलने के कारण ही व्यक्ति की दृष्टि बचाना काफी मुश्किल हो जाता है। इसे काँच बिंदु रोग भी कहा जाता है।

ग्लूकोमा या काला मोतियाबिंद क्यों और कैसे होता है?

आँखों में मौजूद कार्निया के पीछे एक तरल पदार्थ होता है जिसे एक्यूअस ह्यूमर के नाम से जाना जाता है। आँखों के लेंस के चारो ओर स्थित सीलियरी टिश्यू इस तरल पदार्थ को बनाते रहते हैं। आँखों की पौष्टिकता और सही आकार इस तरल पदार्थ की निकासी पर निर्भर करती है। यहाँ तरल पदार्थ के बनने में स्थायी तौर पर वृद्धि या तरल पदार्थ की निकासी में कमी ग्लूकोमा या काला मोतियाबिंद का प्रमुख कारण है। आँखों में इस तरल पदार्थ का बनना और बहना लगातार जारी रहता है। इसके असंतुलन (निकासी नहीं होने) के कारण ही आँखों के अंदरूनी हिस्से में दबाब बढ़ने लगता है। निकासी में कमी होने पर भी सीलियरी टिश्यू इस तरल पदार्थ को बनाते ही रहते हैं जिससे ग्लूकोमा हो जाता है। अगर आँखों पर यह दबाब बढ़ता ही जाए तो आँखों में रौशनी ग्रहण करने वाली नस (ऑप्टिव नर्व जो आँखों से दिमाग तक जाती है) के लिए खून की सप्लाई कम होने लगती है जिससे कि यह नस नष्ट हो सकती है और व्यक्ति को दृष्टि दोष या अंधेपन की समस्या हो जाती है। चूँकि हमारी आँखें कैमरे की तरह केवल फोटो लेने का काम करती है देखने का काम तो हमारा दिमाग करता है, लेकिन यह नस नष्ट हो जाने पर आँखें हमारे दिमाग तक फोटो भेज नहीं पाती और हम कुछ देख नहीं पाते।
आँखों के इस दबाव को नियंत्रित करने के लिए कोई स्थायी तरीका या उपचार अभी तक नहीं है। अंधेपन से बचाव के लिए यह जरूरी है कि शुरूआत में ही इसके बारे में पता लग जाए।

ग्लूकोमा कितने प्रकार का होता है?

ग्लूकोमा या काला मोतियाबिंद मुख्यतः दो (बच्चों में होने वाले को मिलाकर तीन) प्रकार का होता हैः-

  • प्राथमिक खुला कोण – इसमें आँख में बनने और बहने वाले तरल पदार्थ की निकासी नली धीरे-धीरे बंद होने लगती है। जिससे आँखों के अंदर दबाव बढ़ने से ग्लूकोमा हो जाता है।
  • बंद कोण काँच बिंदु – इसमें आँख में बढ़ते दबाव की वजह से आइरिस और कार्निया की चौड़ाई कम होने लगती है और व्यक्ति को साईड में देखने में कठिनाई होने लगती है।
  • कन्जनाइटल ग्लूकोमा – यह बच्चों में होनेवाला ग्लूकोमा है इसमें बच्चों की आँखें लाल होना, आँखों का बड़ा होना तथा आँख से पानी आने जैसी समस्या होती है। इसे नजरअंदाज ना करें और डॉ० के परामशानुसार ही दवा दें व बंद करें।

ग्लूकोमा की जाँच

ग्लूकोमा के शुरूआत में ही पहचान की जा सके इसके लिए तीन प्रकार की जाँच होती हैः-

  • टोनोमीटर द्वारा नेत्र दबाव की माप
  • ऑप्टिक डिस्क (नेत्र विम्ब परीक्षण)
  • दृष्टि के बाहरी क्षेत्र की जाँच के लिए विजुअल फिल्ड्स

ग्लूकोमा या काला मोतियाबिंद के लक्षण

प्रारंभिक अवस्था में इसके किसी प्रकार के कुछ खास लक्षण नजर नहीं आते पर धीरे-धीरे कुछ इस प्रकार के लक्षण ग्लूकोमा या काला मोतियाबिंद के रोगी में नजर आने लगते हैं लेकिन डॉ० प्रारंभिक अवस्था में भी आँखों का परीक्षण कर इसका पता लगा सकते हैं।

  • आँखों में और आँखों के आस-पास दर्द होना
  • सिर में दर्द रहना
  • आँखों में लाली होना
  • चश्मा का नम्बर जल्दी-जल्दी बदलना
  • प्रकाश के स्रोत जैसे बल्ब आदि के चारों ओर रंगीन (इन्द्रधनुषी) गोले जैसा दिखना
  • अंधकार वाले जगह (जहाँ रौशनी बहुत ही कम हो) में देखने में कठिनाई होना
  • साइड में नजर नहीं आना केवल सामने दिखना।

ग्लूकोमा या काला मोतियाबिंद का उपचार/ईलाज

प्रारंभ में इसके उपचार के लिए दवाइयां और आई ड्राप्स ही दिये जाते है। शुरुआत में इससे फायदा होने की संभावना बनी रहती है लेकिन अगर ड्राप्स दवाइयां असर न करे तो फिर लेजर सर्जरी के द्वारा इसका उपचार किया जाता है। इसके अंतर्गत एक ऐसा खुला मार्ग बनाया जाता है जिससे आँखों में बनने वाले तरल पदार्थ (एक्यूअस ह्यूमर) को निकाला जा सके।
ब्रिटेन में डॉक्टरों ने इसके ईलाज के लिए एक आसान तकनीक खोजा है। इसमें ग्रसित आँख में एक बार इंजेक्शन दिया जाता है जिससे आँख में मौजूद तरल पदार्थ आसानी से बाहर आ जाता है। भारत में भी यह जल्द ही उपलब्ध होगा।
काला मोतियाबिंद में जितनी रौशनी चली जाती है वह कभी भी वापस नहीं आ सकती, पर जो रौशनी बची है उसे बचाया जा सकता है अतः जितनी जल्दी हो सके इसका ईलाज शुरू कर देना चाहिए। एक बार हो जाने पर इसका ऐसा कोई ईलाज नहीं है जिससे यह पूरी तरह ठीक हो सके, जितनी रौशनी बची है उसे ही बचाया जाए यही इसका ईलाज है। ग्लूकोमा एक बार हो जाए तो इसके लिए जीवन भर ईलाज की जरूरत होती है।

ग्लूकोमा या काला मोतियाबिंद किसे हो सकता है?

अधिकांशतः 50 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों में इसके होने की संभावना बनी रहती है लेकिन कभी-कभी यह बच्चे, बड़े किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है। वंशानुगत भी यह हो सकता है। अगर किसी को अस्थमा, मधुमेह, रक्तचाप या दिल के समस्या है तो यह उसे भी हो सकती है। कभी-कभी ज्यादा तनावग्रस्त रहने के कारण भी ग्लूकोमा हो जाता है।सफेद मोतियाबिंद का सही समय पर ईलाज नहीं कराने पर भी यह काला मोतियाबिंद में बदल सकता है।

ध्यान देने योग्य बातें

  • अगर आपकी उम्र 40 वर्ष हो जाए तो समय-समय पर आँखों की जाँच कराते रहना चाहिये।
  • बिना डॉ० की सलाह के कोई भी दवा आँखों में ना डालें।
  • किसी बच्चे को आँखों में कोई मामूली समस्या भी हो तो तुरंत डॉ० से इसकी जाँच करायें और बिना डॉ० की सलाह के ज्यादा दिनों तक दवा ना डालें।
  • दवाओं का नियमपूर्वक सेवन करें।
  • सफेद मोतियाबिंद होने पर सही समय पर उसका उपचार करायें अन्यथा काला मोतियाबिंद हो सकता है और आँखों की रौशनी जा सकती है।
  • ग्लूकोमा होने पर व्यक्ति को साइड से दिखाई देना कम हो जाता है केंद्र में काफी समय तक ठीक दिखाई देता रहता है बाद में यह भी दिखना बंद हो जाता है और व्यक्ति समझ नहीं पाता इसलिए समय-समय पर एक-एक आँख बंद कर दूसरे आँख की जाँच करते रहना चाहिए।

लाभ/फायदे देने वाली बातें

  • एंटी ऑक्सीडेंट खाद्य पदार्थों का सेवन करना।
  • हरे पत्तेदार सब्जी जैसे ब्रोकली, पालक, अंगूर, सेब, गाजर खाना।
  • योग और व्यायाम प्रतिदिन करना, इससे आँखों का दबाव कम हो़ता है।
  • आँखों में मौजूद काले रंग वाले भाग को चारों ओर 10 से 15 बार घुमायें इससे आँखों का व्यायाम होता है और आँखें स्वस्थ रहती है।

2 thoughts on “ग्लूकोमा या काला मोतियाबिंद: अंधेपन का एक बड़ा कारण। कैसे इससे बचा जा सकता है?

  • अगस्त 5, 2018 at 12:47 अपराह्न
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    Sir meri ko. Doctor ne glucoma bataya phle tensin km gya tha medicine or injection lene se pr do baar se check up krs raha hu tension badta hi ja raha hai mai kya kru kuchh upay bataiye 8292710972

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    • अगस्त 5, 2018 at 2:57 अपराह्न
      Permalink

      हेल्लो प्रदीप,

      हमलोगों के पास डॉक्टर की टीम नहीं है, लेकिन आप नीचे दिए गए लिंक पे स्वर्गीय राजीव दीक्षित का विडिओ देख सकते हैं. कोई भी उपचार आयुर्वेदिक डॉक्टर की देख रेख में करें.

      https://www.youtube.com/watch?v=iC47TrgBStQ

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