घर बनाने के लिए किस प्रकार की जमीन/भूमि शुभ लक्षणों वाली है।

हमारा एक घर हो ऐसा सपना हर एक व्यक्ति के मन में होता है। घर छोटा हो या बड़ा प्रत्येक व्यक्ति के पास एक घर होना ही चाहिए। कोई भी व्यक्ति घर अपने और अपने परिवार के सुख और शांति के लिए ही लेता है। कोई व्यक्ति कहीं से भी आता है तो वह अपने घर पर ही शांति पाता है। ऐसे में अगर आप घर खरीदने की सोच रहे हैं जहाँ आप सारी जिंदगी बिना किसी बाधा के चैन से रहना चाहते हों तो आपको वास्तु संबंधी कुछ बातों का ज्ञान अवश्य होना चाहिए जिससे कि आप अपने लिए सही भूखंड का चुनाव कर सकें। तो आइए घर या भूखंड खरीदने हेतु वास्तु संबंधी कुछ बातों को जानते हैं।

भूखंड/भूमि के आकार संबंधी कुछ विशेष जानकारियाँ:-

  • कोई भी भूखंड या मकान खरीदते वक्त यह अवश्य ध्यान रखें कि जिस भूमि को आप खरीद रहे हैं वह लंबाई और चौड़ाई में सही अनुपात में हो। चौकोर भूमि अर्थात् वर्गाकार भूमि सबसे उत्तम होती है। यह संपन्नता से युक्त होती है।
  • आयताकार भूमि भी ठीक होती है परन्तु उसकी लम्बाई, चौड़ाई से डेढ़ गुनी से अधिक नहीं होनी चाहिए। लम्बाई चौड़ाई का अनुपात जैसे जैसे ज्यादा होता जाता है वैसे वैसे उस भूखंड के शुभ लक्षणों में कमी आती जाती है। आयताकार भूमि का पूरब-पश्चिम लंबा होने की अपेक्षा उत्तर-दक्षिण लंबा होना ज्यादा अच्छा होता है ।
  • अगर भूमि आयताकार नहीं हो तो यह ध्यान रखना चाहिए कि उस भूमि का आग्नेय (दक्षिण-पूर्व) और नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) का कोना 90 डिग्री के कोण में हो।
  • गौमुखी भूमि को अच्छा माना जाता है अर्थात् वैसी भूमि जिसका आगे का भाग कम हो और पीछे का भाग ज्यादा शुभ फल देने वाली होती है।
  • पूर्व, ईशान व उत्तर दिशा के नीचे स्तर की भूमि शुभ होती है।
  • वैसी भूमि जिसका ईशान कोण अर्थात् उत्तर-पूर्व का भाग बढ़ा हुआ हो, अच्छी होती है। ईशान कोण छोड़कर अन्य कोण का बढ़ा होना, ठीक नहीं होता है।

मिट्टी से जानें भूमि की सकारात्मक ऊर्जा के बारे में:- 

वैसी भूमि रहने योग्य उपयुक्त होती है जहाँ सकारात्मक ऊर्जा हो और रहने के अनुकुल हो यह पहचानने के लिए आपको कुछ उपाय बताए जा रहे हैं इससे भी आप अच्छी भूमि का चयन कर सकते हैं।

  • सबसे पहले जब आप भूमि देखने जाएं तो उस स्थान पर कुछ देर आंखें बंद करके कुछ देर उस जगह की ऊर्जा को पहचानने की कोशिश करें यदि आंखें खोलने के बाद आपको अच्छा महसूस हो तो वह भूमि लेने योग्य है। लेकिन आपको अच्छा महसूस न हो तो वह भूमि न खरीदें।
  • दूसरा उपाय आप यह कर सकते हैं कि उस भूमि पर लगभग एक मीटर लंबा, चौड़ा व गहरा गड्ढा करें और उसमें पानी भर दें कुछ मिनटों बाद देखें अगर गड्ढे का आधे से ज्यादा पानी सूख जाए तो वह भूमि रहने योग्य नहीं है। पानी अगर आधे से कम सूखे तो भूमि ठीक है और अगर पानी बहुत ही कम सूखा हो तो वह भूमि सबसे अच्छी है।
  • तीसरे में आप यह देख सकते हैं कि वहाँ की मिट्टी को अपनी मुठ्ठी में लेकर मुठ्ठी को कसकर बंद करें फिर यदि मुठ्ठी खोलने के बाद मिट्टी आपकी मुठ्ठी में बंधकर ठोस की तरह है तो यह भूमि रहने योग्य अच्छी होती है। लेकिन यदि मुठ्ठी खोलते ही मिट्टी आपकी हांथों से फिसलकर गिर जाती है तो यह भूमि रहने के लिए उपयुक्त नहीं होती।
  • चौथा उपाय आप यह कर सकते हैं कि लगभग एक मीटर लंबा, चौड़ा व गहरा गड्ढा करें और फिर उसे उसी मिट्टी से भर दें अगर पूरा गड्ढा भरने के बाद भी मिट्टी बच जाए तो वह भूमि रहने के बिलकुल ही अनुकूल है।
    वैसी भूमि जिसकी मिट्टी उपजाऊ व भूरभूरी हो, धन बढ़ाने वाली अच्छी मानी जाती है।

भूखंड/भूमि संबंधी कुछ अन्य जानकारियाँ   

  • वैसी भूमि जिसमें से सोना, चाँदी, सिक्के, जस्ता, ईंट, गाय की सींग निकले, धन और सुख देने वाली होती है।
  • वैसी भूमि जिसमें अच्छे संपन्न-समृद्ध लोग रह रहे हों और अब वह उस भूखंड को बेच रहे हों तो ऐसी भूमि तुरंत खरीद लेनी चाहिए।
  • जिस भूखंड को आप खरीदना चाहते हैं यदि उसके उतर या पूर्व की ओर सड़क निकलती हो तो वह भूखंड लेने योग्य है।
  • वैसी भूमि कभी ना खरीदें जिसका ईशान कोण कटा हुआ हो।
    सिंहमुखी भूमि अर्थात् जिसका आगे का भाग ज्यादा और पीछे का भाग कम हो ऐसी भूमि घर बनाकर रहने लायक ठीक नहीं होती।
  • गोलाकार, अंडाकार, त्रिकोणाकार, पंचभुजाकार अर्थात् चार से ज्यादा कोण वाली भूमि भी घर बनाने लायक अच्छी नहीं होती। ऐसे घर में रहने वाले अक्सर किसी न किसी परेशानी से घिरे रहते हैं।
  • जो भूखंड भूतहा या खंडहर जैसा हो वह भी खरीदने योग्य नहीं है।
    जिस भूमि पर थोड़े ही समय में एक से ज्यादा लोगों की आकास्मिक मौत हुई हो ऐसी भूमि ना खरीदें।
  • वैसी भूमि जिसके आस-पास में सार्वजनिक स्थल जैसे मंदिर, अस्पताल, कारखाना, विद्यालय, महाविद्यालय हो नहीं खरीदनी चाहिए। इन सबसे घर की दूरी कम से कम 80 फीट होनी चाहिए।
  • जिस भूमि के सामने या आस-पास में कब्रिस्तान हो वैसी भूमि भी रहने योग्य नहीं होती।
  • दो बड़े-बड़े भवन के बीच में अगर एक छोटा भूखंड हो तो इसे भी लेने से परहेज करना चाहिए।
  • ईशान कोण छोड़कर भूखंड का अगर अन्य कोई भी कोण का बढ़ा हुआ हो तो ऐसी भूमि ना खरीदें।
  • बहुत ज्यादा सूखा अर्थात् बंजर भूमि तथा बहुत ज्यादा गीली मिट्टी वाली भूमि भी नहीं लेनी चाहिए।
  • काली और चिकनी मिट्टी वाली भूमि भी नहीं लेनी चाहिए।
  • वैसी भूमि जिसके आस-पास खाई या गड्ढा हो हानिकारक होती है।
  • अगर भूमि के उत्तर-पूर्व में बड़ा इलेक्ट्रिक पोल हो तो इससे सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश में बाधा आती है।

नोटः-  कोई भी मनुष्य अपने कर्मों के अनुसार फल पाता है या सुख और दुख पाता है। कोई भी किसी का भाग्य नहीं बदल सकता। जिसका भाग्य प्रबल होता है वह अगर वास्तुदोष युक्त घर में भी रहता है तो उसे कोई खास कठिनाई नहीं होती। क्योंकि उसका भाग्य का प्रभाव ज्यादा होता है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति का भाग्य प्रबल न हो तो वास्तुदोष का प्रभाव उस पर होने लगता है। लेकिन अगर भाग्य प्रबल न भी हो पर, सही वास्तु वाले घर में होने पर वास्तु के सकारात्मक प्रभाव के कारण आपको कठिनाईयों का कम ही सामना करना पडे़गा। सभी नियमों का अनुसरण करना संभव नहीं है पर, जहाँ तक हो सके सही और उपयुक्त भूमि का ही चयन करें।

वास्तुनुसार घर :- शांति भरा जीवन


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