तिल और तिल के तेल का महत्व

भारत में प्राचीन काल से तिल के तेल का काफी महत्व है। तिल का तेल आयुर्वेद क रूप में भी उपयागी है। तिल दो प्रकार के होते हैं- काले और सफेद। तिल खाने और औषधी के रूप में उपयोग होता है। तिल को प्रातःकाल एक-दो मुट्ठी चबाकर खाने से ताकत बढ़ती है तथा दाँत भी मजबूत होते हैं। तिल छोटे-छोटे बच्चों के लिए भी उपयोगी माना गया है। प्रतिदिन बच्चों को तिल से बने तिलपापड़ी खिलाने से बच्चे को ताकत होता है।

प्रतिदिन सुबह खाली पेट 50 ग्राम काले तिल खाने चाहिए तथा ठण्डा पानी पीयें। तिल खाने के बाद तीन घण्टे तक दूसरी चीजेे न खायेे। इस प्रयोग के साथ-साथ यदि रोज तिल के तेल की मालिश की जाय तो बहुत लाभ होता है अधिक मोटे व्यक्ति पतले तथा पतले व्यक्ति मोटे होते है। पतले वयक्ति के शरीर इस प्रयोग से पुष्ट तथा सुदृढ़ बनते हैं और दाँतो में मजबूती आती है। यदि स्त्रियाँ यह प्रयोग करेंगी तो उनके सिर के बालों का झड़ना रूक जायेगा,बाल बढ़ेगें और मजबूत बने रहेंगें।

यदि 50 ग्राम की मात्रा अधिक मालूम पड़े तो 45 ग्राम ही लें। 25 ग्राम एक साथ चबाने से दिक्कत हो तो 12-12 ग्राम सुबह-शाम लेकर चबाएँ। यह प्रयोग कम-से-कम एक वर्ष तक करना चाहिए। जो लोग एक वर्ष अधिक समय तक प्रयोग करते हैं, उनको हानि नहीं,फायदा-ही-फायदा होगा। शरीर सुन्दर और मजबूत हो जाता है।

जाड़े के दिनो में फटे हुए हाथ-पैर,गाल और होठ पर तेल लगाने से फायदा होता है। लहसुन डालकर गर्म किया हुआ तिल का तेल कान में देने से कान का दर्द दूर होता है। आयुर्वेद में तिल का तेल उपयोग किया जाता है। तिल खाने की अपेक्षा मालिश करने से फायदा होता है। मँूगफली के तेल,तिल के तेल से मिलते-जूलते गुणों वाला है,किन्तु वह तिल के तेल की तुलना में निम्न स्तर का हैं। तिल के तेल से गुणों की दृष्टि से मूँगफली के तेल से उत्तम है। तिल का तेल पका हो या कच्चा दीर्घकाल तक खराब या नष्ट नहीं होता हैं।
साबुन,मोमबत्ती इत्यादि चीजें बनाने मे तिल के तेल का उपयोग होता है। तिल का तेल शरीर पर लगाने से शरीर हल्का महसूस होता है तथा त्वचा चमकीले एवम् सिर के बाल मजबूत होते हैं। शरीर के किसी अंग में चोट लगे हुए,टूटे हुए या जले हुए स्थान पर तेल लगाने से अतयन्त लाभकारी है।

तिल के तेल का कुल्ला मुँह में दस-पन्द्रह मिनट तक रखने से हिलते दाँत मजबूत बनते है और पायरिया रोग मिटता है। दाँत में दर्द हो तो तेल को गर्म कर उसका कुल्ला किया जाता है या रूई का फाहा मुँह में,जहाँ दर्द हो वहाँ पर रखने से आराम होता है। मोम और सेंधा नमक मिलाकर गर्म किया हुआ तिल का तेल मलने से एड़ियाँ ठीक हो जाते है। राई,आजवाइन,सोठ,लहसुन या हींग डालकर गर्म किया हुआ तेल मलने से और सेंक करने से जोड़ो के दर्द में फायदा होता है। तिल के तेल को थोड़ा-सा गर्म कर प्रतिदिन मालिश करने से कान्ति हीन चमड़ी एक महीेनें में चमकने लगती है,उसकी सुन्दरता बढ़ती है और खुजली भी मिटती हैं हींग और सोठ डालकर गर्म किये हुए तिल का तेल की मालिश करने से कमर का दर्द एवम् जोड़ों का दर्द ठीक होता है।

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