भारत में गायों की स्थिति और देशी गाय के फायदे, Desi gaay ke fayde

स्व0 राजीव दीक्षित के रिसर्च के अनुसार देशी गाय के फायदे और उनका बचाव कैसे करें और साथ ही जानें कि जर्सी गाय का दुध कितना हानिकारक है हमारे शरीर के लिए। पूर्ण व्याख्यान को पढ़ें- यह स्थिति 2014 आम चुनाव के पहले का है, अभी कत्लखानों की संख्या पहले से कम है मगर देशी गाय आज भी उपयोग नही हो रहा है।

कई वर्षो से मैं भारतीय गायों का रिसर्च कर रहा हूँ उनमें से एक समस्या है- गौ हत्या। ये इतनी बड़ी समस्या हमारे भारत देश में है कि हर साल 50 लाख गायों कत्ल होता है। इन 50 लाख गायों का कत्ल के लिए भारत देश में 3,600 कत्ल खानें चल रहे है। भारत सरकार के अदेशानुसार 3,600 कत्ल खाने है। बिना सरकारी अनुमति के गाय कत्ल खानों का कोई लिखित नहीं है।

एक बार मैंने भारत सरकार के कृषि मंत्रालय, मतलब जिसमें पशु विभाग भी आ जाता है उन्हें मैने एक पत्र लिखा था जिसमें मैं पूछा था कि भारत में सरकारी रूप से 3,600 कत्ल खानें है और बिना सरकारी अनुमति के कितने कत्ल खानें है? तो उन्होंने कहा मैने आजतक कभी गिनती नही किया है लेकिन मेरे अनुसार 36,000 कत्ल खाने हैं। 36,000 कत्लखानों में प्रतिवर्ष दो कोटि (50लाख) गाय और गौ वंश की हत्या हो रहा है। इन कत्लखानों से 72 लाख टन गौ मांस बनता है। ये मांस हमारे देश से दुसरे देश मे जाता है, सबसे ज्यादा अमेरिका दुसरे पर यूरोप और जो शेष बच जाता है वो अरब देेश को चला जाता है।

इसपर मैनें गहरी चिंतन किया है कि आखिर बाहर के देश (विदेश) अपने देश के गाय का मांस क्यों नहीं खाते है? मुझे पता चला कि उन्हें गंभीर बिमारी है। उनके गायों के सींग में घाव हो जाते है, पैरों में घाव हो जाते है। अगर कोई इसका मांस खाये तो उन्हें भी गंभीर बिमारी हो जाती है। इसलिए उन्हें भारतीय गौ मांस चाहिए। भारतीय गायों में ऐसी कोई बिमारी नहीं होती है।

मैने थोड़ा और अभ्यास किया कि भारतीये गायों में यह बिमारी क्यों नहीं होती है। उसके बाद पता चला कि विदेशी लोग अपने गायों को मांस खिलाते है। गाय एक शाकाहारी प्राणी है उसे मांस खिलाने पर कुछ तो परेशानी तो होगी ही, अब आप के मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि उन्हें मांस क्यों खिलाया जाता है? मैने यह सवाल वहाँ के लोगों से पूछा, तो उनलोगों ने कहा मांस बढ़ाने के लिए मांस खिलाते हैं तब मुझे पता चला कि वहाँ के लोगों का गाय के द्वारा प्रथम पैसा कमाने का स्रोत मांस ही हैं। दूसरा स्रोत दूध है। यूरोप अमेरिका में दूध पीने का काई परम्परा नहीं है। वे लोग मांस का सेवन करना ही ज्यादा पंसद करते हैं। वहाँ के लोग अपने गायों को इतना चर्बीदार बना दिया है कि वे लोग विचित्र दिखते हैं जैसे कोई भैंसा हो। जर्सी गायों को अपने बच्चे से कोई खास लगाव नहीं होता है। उनके बच्चे किसी और जर्सी गाय के बीच चले जाते है लेकिन भारतीये नस्ल की गाय अपने बच्चे से इतना प्यार करती है कि अगर कोई उसके बच्चे को बुरे नजर से देख ले तो वे मार डालने को तैयार हो जाती है। भारतीये गायों कि सबसे बड़ी खुबी यह है कि वे अपने बच्चे को हजारों के भीड़ में उसे पहचान लेती है। जर्सी गाय कभी भी पैदल नहीं चल पाती है, चलाने की कोशिश करो तो वह बैठ जाती है लेकिन भारतीय गाय में यह विशेषता है कि वह पैदल पहाड़ पर चढ़ जाती है। आपको मौका मिले तो हिमालय की परिक्रमा करें, हिमालय की जितनी ऊँचाई पर इंसान चढ़ जाता है उतना ही देशी गाय भी चढ़ जाती है। जर्सी गाय पूर्ण रूप से भैंस के स्वभाव की है किसी सड़क पर जर्सी गाय खड़ी हो और आगे-पीछे से गाड़ी आ रही हो तो वह जल्दी नहीं हटती है। कुछ यूरोप के लोग कहते है कि इसका वंश सुअर के जींन से हुआ है। इसका उपयोग मांस या दुध में करने से मधुमेह या कैंसर और भी कुछ बिमारी हो जाती है। अमेरिका, यूरोप जैसे देशों में यह कहा गया है कि यहाँ का उपयोग न करें बल्कि भारत की गाय का उपयोग करें। इसलिए वहाँ के लोग एक समझौता किये है भारतीय गायों की मांस खायें। 75 लाख टन मांस साल में जाता है। हर साल ढ़ाई करोड़ गाय की कत्ल होता हैं।

इसलिए आप सभी से यह अपील है कि देशी गाय का उपयोग करें और गौ वंश को कत्लखानों में जाने से बचाएँ।

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