मन के हारे हार है, मन के जीते जीत

                                                                               दो मेढ़क मित्र की कहानी
एक बार की बात है किसी तालाब में दो मेंढ़क रहा करते थे, जिनमें से एक मोटा और एक पतला था। सुबह जब वे खाने के तालाश कर रहे थे, अचानक वे एक चिकनी मिट्टी के सूखे तालाब(दल-दल) में गिर गये, जिसका किनारा बहुत चिकना था और हमेशा पैर मिट्टी के अंदर फंस जाता जिसके कारण वे उछल भी नहीं पा रहे थे। इसी कारण वे बाहर नही निकल पा रहे थे। दोनों काफी देर तक गीले मिट्टी से निकलने का पर्यत्न कर रहे थे ताकि जल्द-से-जल्द निकला जा सके। लेकिन घंटों प्रयास करने के बाद भी कोई उम्मीद की किरण नहीं दिखाई दे रही थी, दोनों थक चुके थे। मगर मोटा मेढ़क ज्यादा थक चुका था और अपने दोस्त से कहा कि अब मै बाहर निकल नहीं सकता वह जिंदगी से हार चुका है। वह फिर हाथ-पैर मारना छोड़ दिया जिसके कारण वह मिट्टी के अंदर चल गया और मर गया। मगर पतला मेंढ़क लगातार पर्यत्न करता रहा उम्मीद नहीं छोड़ा, जिसके कारण उसके सतह वाली मिट्टी सूख गया, उसके लगातार पैर चलाने के कारण वह निकलने में कामयाब हो गया। पतले मेढ़क जब बाहर निकला तो बड़ा अफसोस हुआ अगर उसका मित्र थोड़ा और प्रयास करता तो वह भी बच जाता।

तो मित्रों, परिशानियाँ हर इंसान की जिन्दगीं में आती है और कई बार इतना कठिन आती है कि उसे झेल पाना मुश्किल हो जाता है, लेकिन सच मानिये परिस्थिती चाहे जितनी भी कठिन क्यों न हो, अगर आप साहस,विरता और हिम्मत के साथ कोई काम करें तो कोई काम असंभव नहीं। जीत हमेशा आपकी कदम चुमेगी।

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