मांसाहार या सात्विक भोजन – कौन है स्वास्थ्य के लिए अच्छा

विधाता (भगवान) ने मनुष्य को एक सर्वश्रेष्ठ प्राणी के रूप में पृथ्वी पर भेजा है। मनुष्य में गलत और सही वस्तुओं को समझने के लिए मस्तिष्क दिया है, परन्तु मनुष्य सर्वभक्षी प्राणी के रूप में विख्यात होता जा रहा है। इसका खास कारण है- मांस,मदिरा और अंडा का सेवन। आज का मनुष्य पशु-पक्षी से भी नीचे के स्तर पर जा पहुँचा है। पशु-पक्षी तो खाने योग्य भोजन को ही ग्रहण करता है। आज का मनुष्य तीतर,कबूतर,बटेर,मछलियों,मेंढ़कों,मुर्गियों,बकरियों इत्यादि को भी चट कर रहा है।

मांस के सेवन से कई प्रकार की बीमारियों और बुरी प्रवृत्तियों का जन्म होता है, क्योकि मांस खाने वाले प्राणी गन्दी -गन्दी चीजों का भक्षण करते हैं। गंन्दी चीजों का भक्षण करने से उनके शरीर में कई तरह की किटाणुओं का जन्म होता रहता है और उसी किटाणुयुक्त मांस का सेवन कर मनुष्य अपने को बलवान सवित करने में लगा है।

जो मनुष्य मांस भक्षण करते हैं उनके शरीर और रजवीर्य आदि धातु भी दुर्गन्धयुक्त होती है,तथा कैंसर जैसी रोगों का कारण बनता है। मांस-मदिरा एंव अण्डा खाने वाले मनुष्यों में धैर्य एंव सहनशीलता की कमी पायी जाती है, तभी तो आज मनुष्य रिश्ते की पहचान खोने लगा है। बलात्कार ,लुट और आत्महत्या जैसे अपराधों को जन्म देने लगा हैं। इसका मुख्य कारण है- सर्वभक्षी मनुष्य(अर्थात् मांस,मंदिरा और अंडा को भोजन के रूप में ग्रहण करना)।

प्राचीन भारत में मांस-मदिरा एंव अण्डे का सेवन नहीं होता था। बड़े-बड़े ऋषि मुनि भी ठण्डे के मौसम में लंगोट पहनकर ही वर्षो तपस्या करते रहते थे। आज सर्वत्र मांस-मंदिरा और अण्डे खाने का विज्ञापन बड़े-बड़े के माध्यम से प्रचारित किया जा रहा है। लोग मजे लेकर मांस-मंदिरा एंव अण्डे का सेवन कर रहे हैं। जो कई तरह की बीमारियों और अपराधों को जन्म दे रहा है। विश्वप्रसिद्ध साहित्यकार बनार्डशाँ ने यहाँ तक कह दिया कि ‘मेरा पेट कोई कब्रिस्तान नही है जिसमें मुर्दे को जगह मिले।

महाभारत में भगवान श्री कृष्ण भी कहें है कि “जैसा खाओगे अन्न वैसा होगा मन”

यह कहावत भी चरितार्थ हो रहा है कि “रोपे पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से खाये”

अतः सभी मनुष्यों का सबसे उत्तम भोजन शाकाहारी है जिसमें दूध,रोटी,मक्खन,फल एवं फूल है। इनका सेवन कर मनुष्य एक अच्छे प्राणियों की श्रेणी का दर्जा पा सकते हैं और आने वाली पीढ़ी का निर्माण कर सकते हैं। आपके बाद आने वाले बच्चे शाकाहारी आहार ग्रहण कर एक अच्छे समाज का निर्माण करेंगें। अगर आप चाहते हैं कि दूसरे की बहू-बेटियों को कुदिष्टि से न देखे,दुर्व्यसनों से दूर रहें,आपमें नैतिक साहस हो। आपका मस्तिष्क सबल हो तो आप आहार से मांस-मदिर एंव अण्डे को समूल निकाल बाहर करें।

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