राजीव दीक्षित कौन थे, उनका जन्म, उनका गांव ! उनका जीवन परिचय।

राजीव दीक्षित भारत के ऐसे सामाजिक कार्यकर्ता थे, जिन्होंने अपने विचारों से पूरे भारत वर्ष में स्वदेशी आंदोलन का प्रचार-प्रसार लगभग सभी गांवों ,शहरों में किया। इसी बीच उन्होंने भारत के इतिहास और विदेशी कंपनीयों का भंडाफोर,लूट का पर्दाफास किया था, उन्होनें बताया था कि किस तरह भारत गरीबी की ओर बढ़ रहा है। राजीव दीक्षित को खुलकर बोलना पंसद था, वो किसी नेता से नहीं डरते थे, वे सदैव भारत के नेताओं को असलीयत जनता को बताया करते थे। राजनीतिक प्रश्नों के अलावा ,उन्होंने घरेलु आरोग्य पद्धति और स्वदेशी का भी प्रचार किया। जिससे देश के लाखों लोगों को लाभ पहुँचा। आइए देखते है राजीव दीक्षित के जीवन के कुछ जानकारियाँ- राजीव दिक्षित का जन्म 30 नवम्बर 1967 को उत्तर प्रदेश, अलीगढ़ जिले के नाह नाम के गांव में हुआ था। उनके पिताजी का नाम राधेश्याम दिक्षित और माता का नाम मिथीलेस कुमारी दिक्षित था। राजीव दीक्षित के दादा एक स्वतंत्रता सेनानी थे उन्होंने कई स्वदेशी आंदोलन में भाग लिया। राजीव दीक्षित के पिता एक बी0टी0ओ0 ऑफीसर थे। राजीव दीक्षित स्वयं दो भाई और एक बहन थे।
उन्होंने प्राथमिक शिक्षा अपने ही गांव में ली, उन्होंने बात-चीत में बताया था कि उनके गांव में बिजली तक नहीं था जिससे उन्हें 5 कि0मी0 पैदल ही जाना पड़ता था। राजीव दिक्षित ने माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद से ली। वे उच्च माध्यमिक परीक्षा उतीर्ण करने के बाद इलाहाबाद चले गये, जहॉं उन्होंने बी0 टेक और एम0टेक0 किया।

अब मैं आपको बताता हूॅं उनके स्वदेशी रिसर्च के बारे में- अपने बी0टेक पढ़ाई के दौरान वे रिसर्च के सिलसिले में नीदरलैंड गये थे जहॉ पर उन्हें अपने रिसर्च के बारे में बोलना था। उन्होंने अपना रिसर्च अंग्रेजी में बोलना शुरू किया तो एक वैज्ञानिक ने उन्हें स्वदेशी भाषा में अपना रिसर्च पढ़ने बोला तो वे बोले अगर मैं हिन्दी में बोलूगॉं तो किसी को समझ नहीं आयेगा, तो वह वैज्ञानिक ने बोला हमारे समझने या ना समझने की चिंता आप क्यों करते हैं यहॉ अनुवाद करने का मशीन उपलब्ध है इसलिए आप स्वदेशी भाषा में बोले। वहॉं वे कुछ वैज्ञानिक से मिले और पूछा आपने अपने स्वदेशी भाषा में ही शिक्षा ग्रहण किया तो सभी ने बोले हाँ। तब वे सोचे कि सभी देश के नागरिक अपनी भाषा में ही शिक्षा ग्रहण किया करते है तो भारत में ऐसा क्यों नहीं! तब उन्होंने भारी चिंतन किया कि भारत में ऐसा क्यों नहीं हो सकता है फिर वह भारत लौटे और सभी विदेशी कम्पनियों का बैंड बजाना शुरू किया । वे अपने जीवन लक्ष्य बनाये कि विदेशी कम्पनियों की लूट से भारत को आजाद कराना है, उन्होंने भारत में “आजादी बचाओं आंदोलन” की शुरूआत की । सन् 1991 में वे कुछ साथियों के साथ मिलकर इस आंदोलन की शुरूआत की, वैसे तो इस आजादी बचाओ आंदोलन की शुरूआत तो 1984 भोपाल गैस हत्याकांड से ही शुरू हो चुकी थी, जिसमें युनियन क्रार्बोइक के वजह से कई लोगों की जान गई थी। उस समय इस आंदोलन का उद्देश्य भोपाल गैस हत्याकांड की आरोपी अमेरिकी कम्पनी युनियन क्रोर्बोइक को इस देश से भगाना था। इस कम्पनी को उस समय भारत सरकार ने माफ कर दिया तब इसको देश से बाहर निकालने के लिए इस अभियान की शुरूआत की, इस अभियान में राजीव दीक्षित और उनके मित्र सफल भी हुए। उस कम्पनी को देश छोड़कर भागना पड़ा ,इसके बाद उन्होंने दूसरे कम्पनी कारगील,डुरर्गोन जैसे बड़ी कम्पनी को देश से भगाया। इसके बाद वे 1991 में डकंन प्रस्ताव के विरोध में कई व्याख्याण एवं रैलियॉ की| इस प्रस्ताव के तहत अनेकों विदेशी कम्पनी को व्यापार की मंजूरी मिलने वाली थी जब इस डंकन प्रस्ताव के अध्धयन के लिए अर्थन डंकन स्वंय भारत आया तो राजीव दिक्षित और उनके मित्र ने उसे एअरपोर्ट पर रोक दी और मारपीट की जिसके कारण उन्हें तीहार जेल जाना पड़ा था।

राजीव दीक्षित ने अनेको जन सभाएं की और लोगों को जागरूक किया, हम उनके द्वारा बताये गए स्वेदेशी पद्धति को आगे के लेख में प्रकाशित करेंगे.

ये उनके जीवनी की शुरुआत थी| यह बड़ा ही दुखनीय है राजीव दीक्षित की अकस्मात् मृत्यु हो गयी। अगले भाग में उनके मृत्यु-रहस्य और उनके अतुल्य कामों के बारे में जानेगें। तो पढ़ते रहिये ज्ञान मेला, धन्यवाद।

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