हिन्दू धर्म के चारों युग की विशेषताएँ जानें – सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग, कलियुग और मनुष्य की उत्पत्ति

श्रीमद्भागवत पुराण में पुरुषोत्तम भगवान विष्णु से उत्पन्न ब्रह्या की आयु 100 वर्ष मानी गयी है। पितामह ब्रह्या की आयु का आधा 50 वर्ष पूर्वपरार्ध (प्रथम) तथा उत्तरार्ध के 50 वर्ष को द्वितीय परार्ध कहते है। वर्तमान में पूर्वाध 50 वर्ष आयु व्यतीत हो चुकी हैं। सतयुग,त्रेता,द्वापर तथा कलियुग को मिलाकर एक महायुग कहलाता है। एक हजार महायुग व्यतीत होने पर ब्रह्या का 1 दिन होता है और इतनी ही वर्षो की रात होती है।

 !! सतयुग व्यवस्था !!

  • सतयुग में पाप 0(शून्य), पुण्य 20(विश्वा) मनुष्य की आयु एक लाख वर्ष, शरीर की ऊँचाई 21 हाथ, स्वर्णमय पात्र, रत्नमय द्रव्य का व्यवहार, मनुष्यों में ब्रह्याण्डगत प्राण,दिव्यान्न भोजन,पुष्कर तीर्थ,सतयुग में धर्म अपने चारो पैर से  धरती पर स्थिर था।

1. इक्ष्वाकु 2. मान्धाता 3. मुचुकुंद 4. भैरव 5. नन्दक 6. अन्धक 7. हिरण्याक्ष 8. हिरण्यकश्यपु 9. प्रहलाद 10. विरोचन 11. बलि 12. बाणासुर 13. कपिल 14. कपिलभद्र राहुए। तीनों लोकों में इनकी गति रही। ये सभी ब्रह्या के उपासक थे। प्रजा पालन में तत्पर, दिव्य अन्न भक्षण करने वाले थे। दिव्य वस्त्र धारण करते थे। ये यदि एक भी पाप करते थे तो उनका देश विनष्ट हो जाता था। ब्राह्यण वेद पाठी थे। सत्यव्रत ईशा आराधना में संलग्र रहते थे। आर्शीवाद,श्राप,अनुग्रह देने में सामर्थ्य थे। पर द्रव्य,पर स्त्री विरत थे। गायें इच्छानुसार दूध देनेवाली होती थी। नदियों में भरपूर जल, फल-फूलों से वृक्ष समय पर सदा भरपूर रहते थे। सूर्य ग्रहण 32000, चन्द्र ग्रहण 5000 हजार हुए। सभी मनुष्य सत्यवादी और धर्मात्मा थे।

!! त्रेतायुग व्यवस्था !!

त्रेतायुग – वैशाख शुक्ल 3 गुरूवार, रोहिणी नक्षत्र तथा धृति योग में प्रारम्भ हुआ। इसमें वामन,परशुराम व राम तीन अवतार हुए।त्रेतायुग की आयु 12,96,000 मानव वर्षों की सधिं सहित थी। त्रेतायुग में धर्म 3 पद से पृथ्वी पर प्रतिष्ठित  था।

  1. वामनावतार- सर्वजीत संवत्सर में भाद्रपद शुक्ल 12 शुक्रवार को श्रवण नक्षत्र तथा शोभन योग में हुआ था। इस युग में  यज्ञ करते हुए बलि से भगवान वामन ने 3 पग पृथ्वी दान लेकर उसे पाताल भेज दिया।
  2. परशुरामावतार- सर्वजीत संवत्सर, वैशाख शुक्ल 3 मंगलवार, पूर्वाभाद्रपद ऩक्षत्र, वरीयान योग में हुआ। यह अवतार अभिमानी क्षत्रियों के विनाश व भक्तों के रक्षार्थ हुआ।
  3. रामावतार- तारण संवत्सर, चैत्र शुक्ल नौमी गुरूवार को पुनर्वसु नक्षत्र, सुकर्मां योग, कर्क लग्न में मध्याहन काल में दशरथ पुत्र के    रूप में हुआ था। यह अवतार रावण वध के लिए हुआ।

युग व्यवस्था – त्रेता में पाप 5, पुण्य 15 (विश्वा) मनुष्यों की आयु 10,000 वर्ष, शरीर की ऊँचाई 14 हाथ, चाँदी के पात्र, सुवर्ण द्रव्य,     अस्थिगत प्राण, नैमिषारण्य तीर्थ, स्त्रियाँ पतिव्रत परायण थी। सूर्य ग्रहण 3200, चन्द्र ग्रहण 500 हुए। सभी लोग     धर्म-कर्म में परायण थे।

  •   त्रेतायुग में सूर्यवंशी राजा- 1.मनु 2.धूम्राक्ष 3.विकुक्षि 4.हरिश्चन्द्र 5.रोहिताश्व 6.सगर 7.मुञज 8.अश्वभुज 9.भगीरथ 10.दिलीप 11.रघु 12.अज 13.दशरथ 14.रामचन्द्र 16.कुश 17.अग्निवर्ण 18.मेघद्युति राजा हुए।  – इनका इन्द्रलोक तक गमन और ब्रह्य की उपासना में तत्पर रहते थे। प्रजापालन में निरत थे। दिव्यान्न भक्षण, दिव्य वस्त्र धारन करते थे। इनमें कोई पाप करता तो गाँव का गाँव नष्ट हो जाता था। ब्राह्यण वेदों का पाठ करते थे। परस्त्री,परद्रव्य विमुख थे। श्राप -अनुग्रह सामर्थ्य होते थे। गायें 3बार दूही जाती थी। पृथ्वी सभी प्रकार से परिपूर्ण थी। एक बार बोने से फसल सात बार काटी जाती थी।

!! द्वापर युग व्यवस्था !!

 द्वापर युग-माघ कृष्ण 30 अमावस्या शुक्रवार,धनिष्ठा, वरीयान योग में रात्रि में प्रारंभ हुआ था। द्वापर युग प्रमाण 8,64,000 मानव वर्ष   है। इसमें कृष्ण और बुद्ध दो अवतार हुए।

 1. कृष्ण अवतार- भाद्र कृष्ण अष्टमी दिन बुधवार, रोहिणी नक्षत्र, निशिथ काल(मध्यरात्रि) में हुआ। यह अवतार कंस आदि दुष्ट अत्याचारी राजाओं के मारने व गोप बन्धुओं के रक्षा के लिए हुआ।

2. बुद्धावतार- आश्विन शुक्ल 10 गुरूवार को हुआ था। यह अवतार दैत्यों को मोहित करने व मारने तथा प्रजा के शान्ति के लिए      हुआ था।  द्वापर युग व्यवस्था- द्वापर में पाप 10, पुण्य 10(विश्वा) मनुष्यों की आयु 1000 वर्ष, ऊँचाई 7 हाथ थी। ताम्रपत्र,रोप्यमय,द्वव्य,कुरूक्षेत्र   प्रमुख तीर्थ था। त्वचा गत प्राण थे। स्त्रियाँ शंखिनी थी। सूर्य ग्रहण 320,चन्द्र ग्रहण 50 हुए। सभी वर्ण अपने  धर्म-कर्म में लगे रहते थे। द्वापर युग में धर्म केवल दो चरणों से पृथ्वी पर प्रतिष्ठित था।

इस युग में चन्द्रवंशी   राजा- 1.सोम 2.बुध 3.पुरूरवा 4.नल 5.अनल 6.नहुष. 7. शांतनु 8.विचित्र वीर्य 9.चित्रवीर्य 10. पाण्डु 11.युधिष्ठिर 12.अभिमन्यु 13.परीक्षित 14. जन्मेजय हुए। इनका गमन सुमेरू पर्वत तक था। दिव्यान्न भोजन,दिव्य वस्त्र धारण करते थे। ईश्वर आराधना में तत्पर रहते थे।गायें दो बार दुही जाती थीं। फसल बोने के बाद 5 बार काटी जाती थी।

!! कलियुग व्यवस्था !!

कलियुग का आगमन भाद्र कृष्ण त्रयोदशी रविवार, श्लेषा नक्षत्र तथा व्यतिपात योग में अर्धरात्रि में हुआ। कलियुग का कुल आयु प्रमाण 4,32,000 मानव वर्ष हैं। इसमें एक अवतार सम्भल देश में (विष्णु नामक) गौड़ ब्राह्यण के घर कल्कि नाम से होगा। कलियुग में पाप 15, पुण्य 5(विश्वा),मनुष्यों की आयु 100 से 60 वर्ष,शरीर की ऊँचाई 3हाथ, मिट्टी तथा लौह के पात्र, ताम्रमय व लोैह द्रव्य, गंगा तीर्थ तथा अन्नमय प्राण होगा। कलियुग में धर्म के अन्य अंगों की पूर्णतया उपेक्षा होगी। लोग झूठ बोलने वाले असत्यवादी होगें। सभी वर्ण अपने अपने कर्म से रहित होगे। गायें अल्प दुध देने वाली होगी। कलियुग में पृथ्वी बीज रहित, औषधियाँ रस रहित होंगी। नीच लोग सन्यासी का वेष धारण कर सन्यास आश्रम को बदनाम करेंगें। सूर्यग्रहण-चन्द्रग्रहण अधिक होगें। राजा लोग अपने धर्म को त्याग देंगें। ब्राह्यण पथभ्रष्ट होगें। स्त्रियाँ पति विरोधी होगीं, पुत्र,माता-पिता विरोधी होगें। कलियुग में सर्वत्र कष्ट रहेगा। कलियुग में धर्म मात्र पद पर स्थिर रह जायेगा। पृथ्वी गंगा विहीन हो जायेगीं लोग भूत,प्रेत की पूजा करेगें।

भगीरथी गंगा का कथन है- जब तक मैं तुम्हारे साथ धरती लोक में बहती रहूँगीं। जब तक गुरू नक्षत्र ग्रह मंडल में स्थित रहेंगें।बड़वा,नल,समुद्र में कार्यरत रहेगा, मैं धरती नहीं छोड़ूगीं। कलियुग के 10,000 वर्ष बाकी रहने तक प्रतिज्ञावद्ध हुँ। कलियुग के आरम्भ में छः शाका(संवत्सरकर्ता) चलाने वाले राजा होंगें- 1.युधिष्ठिर 2.विक्रमादित्य 3.शालिवाहन 4.विजयाभिनन्दन 5.नागार्जुन 6.कल्कि राजा आरम्भ में युधिष्ठिर शाका 3044 तक चन्द्रवंशी राजा-1.अर्जुन 2.अभिमन्यु 3.परीक्षित 4.जनमेजय 5.वत्सराज 6.युवनाश्व आदि राजा हुए।

इसके बाद सूर्यवंशी राजा क्रमशः अश्वपति,गजपति,नरपति,महिपति,महेन्द्रपाल,गन्धर्वसेन आदि राजा हुए। यवनवंशी राजाओं के बाद गौरागंवशी महारानी विक्टोरिया,सप्तम एडवर्ड, पंचम जार्ज(अंग्रेजी हुकूमत)ठीका के राजा राज करेंगे।                                         लूटपाट,चोरी,बेइमानी,धांधली,दगाबाजी,दल बदलू सरकारों का राज्य होगा। नौकरशाही गरीब जनता को चूंसेगी,उत्पीड़न करेगी। हर जगह फर्जी आँकाड़ा,फर्जी जाँच,फर्जी न्याय की अधिकता होगी। जनता के ऊपर अनाचार अत्याचार का बोलबाला होगा। ’’जिसकी लाठी उसकी भैंस’’वाली कहावत लागू होगी। नेताओं की होड़बाजी होगी। हरिजनों का राज्य चलेगा। कलि के 821 वर्ष शेष रहने पर कल्कि का अवतार होगा।जो बिगड़ी शासन व्यवस्था को ठीक करेंगें।

2 thoughts on “हिन्दू धर्म के चारों युग की विशेषताएँ जानें – सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग, कलियुग और मनुष्य की उत्पत्ति

  • दिसम्बर 24, 2017 at 11:52 पूर्वाह्न
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    Today,I have learned about Hindu dharma.I like gyanmela and his name.thanks…

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