बिना ब्रह्मचर्य के आध्यात्मिकता या साधना में सफलता?

बिना ब्रह्मचर्य के आध्यात्मिकता या साधना में सफलता? यम के अंतर्गत ब्रह्मचर्य अपने आपमें सब कुछ समाये हुए है |

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सोलह सोमवार व्रत की विधि एवं नियम-solah somvar vart katha

सोमवार का व्रत चैत्र,वैशाख,सावन,मार्गशीर्ष, कार्त्तिक मास में प्रारम्भ किया जाता है। साधारणतः श्रावण मास में सोमवार व्रत का विशेष लाभ

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आत्मा क्या है तथा आत्मा का स्वरूप क्या है-atma kya hai

आत्मा के स्वरूप जानने से पूर्व ये जान लें कि समस्त वेद (ऋग्वेद,यजुर्वेद,सामवेद और अथर्ववेद) जिसका प्रतिपादन करते हैं,वह है

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शिव रूद्राष्टकं

नमामिशमीशान विर्वाण रूपं। विभुं व्यापकं ब्रह्म वेद स्वरूपं।। निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं। चिदाकाशमाकाश वासं भजेऽहं।। निराकार मोंकार मूलं तुरीयं। गिराज्ञान गोतीतमीशं

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हनुमान चालीसा और उनका अर्थ हिन्दी में

तान्त्रिक पूजन विधि- प्रातः स्नान करके लाल वस्त्र पहनकर हनुमानजी की मूर्ति के सामने बैठकर और सिन्दूर या सिमरक, चावल,

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हिन्दू धर्म के चारों युग की विशेषताएँ जानें – सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग, कलियुग और मनुष्य की उत्पत्ति

श्रीमद्भागवत पुराण में पुरुषोत्तम भगवान विष्णु से उत्पन्न ब्रह्या की आयु 100 वर्ष मानी गयी है। पितामह ब्रह्या की आयु

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